ग्वालियर/विदिशा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। विदिशा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पर कथित अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूलों के खेल मैदान विद्यार्थियों की शिक्षा, शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनका अनधिकृत या अनुचित तरीके से किसी अन्य काम में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश वाई. कोग्जे और न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की युगलपीठ ने की। यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता पवन सिंह रघुवंशी द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा था। याचिका में विदिशा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान से कथित अतिक्रमण हटाने और मैदान को विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
मैदान पर कथित कब्जे को लेकर पहुंचा था मामला
याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्कूल के खेल मैदान का विद्यार्थियों को अपेक्षित रूप से उपयोग नहीं मिल पा रहा है। मैदान का इस्तेमाल अन्य गतिविधियों के लिए किए जाने की बात भी याचिका में उठाई गई थी। याचिकाकर्ता ने विदिशा जिले के अन्य सरकारी स्कूलों और उनके खेल मैदानों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि स्कूल के मैदान विद्यार्थियों के शारीरिक और समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इनका उपयोग ऐसे किसी कार्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को खेल सुविधाओं से वंचित होना पड़े।
प्रशासन ने मैदान स्कूल को सौंप दिया
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित शिकायत का समाधान कर दिया गया है। स्कूल के प्राचार्य की ओर से जारी प्रमाणपत्र भी कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार मैदान परिसर से लगा कनारा क्रिकेट क्लब का बोर्ड हटाया गया और स्कूल का बोर्ड लगाया गया। मैदान से संबंधित ताले और उनकी चाबियां भी स्कूल के प्राचार्य को सौंप दी गईं। इसके बाद विद्यार्थियों को मैदान और वहां उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करने में बाधा नहीं होने की जानकारी कोर्ट को दी गई।
बच्चों के खेलकूद को मिलेगी प्राथमिकता
प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि मैदान पर क्रिकेट प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां जारी रह सकती हैं, लेकिन स्कूल के विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों और उनकी सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। मैदान के संचालन और व्यवस्था की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन के पास रहेगी।
कोर्ट ने अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश
मामले में तत्काल शिकायत का समाधान होने के बाद हाई कोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी स्कूल परिसरों और खेल मैदानों को सुरक्षित रखा जाए।
कोर्ट ने कहा कि इन सुविधाओं का उपयोग विद्यार्थियों की शैक्षणिक, शारीरिक और खेल गतिविधियों के लिए होना चाहिए तथा भविष्य में किसी भी तरह के अनधिकृत या अनुचित उपयोग की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
स्कूल के मैदान सिर्फ जमीन का हिस्सा नहीं
सरकारी स्कूलों में खेल मैदान विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके शारीरिक विकास और खेल प्रतिभा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में मैदानों का दूसरे कार्यों में इस्तेमाल होने से विद्यार्थियों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद स्कूल परिसरों और खेल मैदानों के उपयोग को लेकर संबंधित विभागों और प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है।
विदिशा का शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिला प्रशासन की आधिकारिक सूची में सरकारी विद्यालय के रूप में दर्ज है।
क्या था पूरा मामला?
मामला विदिशा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान से जुड़ा था।
मैदान के कथित अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों को लेकर जनहित याचिका दायर हुई थी।
प्रशासन ने मैदान से क्लब का बोर्ड हटाकर उसे स्कूल प्रबंधन को सौंप दिया।
मैदान की चाबियां स्कूल के प्राचार्य को दी गईं।
कोर्ट ने सरकारी स्कूलों के मैदानों को विद्यार्थियों की शिक्षा, खेल और शारीरिक विकास के लिए सुरक्षित रखने की अपेक्षा जताई।

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