भोपाल। मध्यप्रदेश की जेलों में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार एवं तनावग्रस्त बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुधार की दिशा में जेल विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के प्रथम चरण में केंद्रीय जेल भोपाल में जेल विभाग का पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इस कार्ययोजना को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
इस पहल को लेकर 21 अगस्त 2026 को मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य जेलों में बंदियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझना, तनावग्रस्त बंदियों की पहचान करना और उन्हें आवश्यक मनो-सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।
भोपाल में स्थापित होगा पहला काउंसलिंग सेंटर
जेल विभाग की योजना के अनुसार, इस पहल के प्रथम चरण में केंद्रीय जेल भोपाल में पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां से प्राप्त अनुभव और परिणामों के आधार पर आगे प्रदेश की अन्य जेलों में भी इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
28 जेलकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
इस पहल की तैयारी के तहत राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों को भोपाल स्थित क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान में आमंत्रित किया गया। यहां 6 जुलाई से 12 जुलाई तक सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण में प्रदेश की विभिन्न जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारियों को मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान और काउंसलिंग के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। इनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल थे।
प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी-कर्मचारियों ने संबंधित जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग भी की। जेल विभाग के अनुसार, इस पहल से मिले फीडबैक और परिणामों की समीक्षा में बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए।
अब तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर
MOU के तहत जेल विभाग द्वारा चयनित अधिकारी-कर्मचारियों को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर भेजकर मास्टर ट्रेनर कोर्स कराया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी-कर्मचारी जेल विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे और अन्य जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे।
इस व्यवस्था के जरिए ऐसा प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने का लक्ष्य है, जो जेलों में बंदियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझ सके, तनावग्रस्त बंदियों की पहचान कर सके और उन्हें आवश्यक मनो-सामाजिक सहयोग उपलब्ध करा सके।
मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक व्यवहार पर फोकस
जेल विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बंदियों को केवल कारावास तक सीमित रखने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। इससे जेलों में संचालित सुधारात्मक सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
इस पहल को बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे प्रदेश की अन्य जेलों तक विस्तार
पहले चरण में केंद्रीय जेल भोपाल में काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर योजना को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में रिसर्च के नाम पर किसी निश्चित संख्या में बंदियों के “दिमाग का अध्ययन” किए जाने, किसी बंदी को अपराधी मानसिकता वाला घोषित करने या भविष्य में उसके अपराध करने की भविष्यवाणी करने जैसी कोई बात नहीं कही गई है। इसलिए इस खबर को मानसिक स्वास्थ्य, साइको-सोशल काउंसलिंग और सुधारात्मक व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना ही तथ्यात्मक रूप से उचित रहेगा।

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