लुधियाना/बिहार। पंजाब के लुधियाना जिले के रहने वाले बुजुर्ग चमन्न लाल के लिए एक अनजानी यात्रा उस समय भावुक कर देने वाले मिलन में बदल गई, जब वे गलती से बिहार पहुंच गए। परिवार और गांव का सही पता न बता पाने के कारण बुजुर्ग कई दिनों तक परेशानी में रहे। इसी दौरान एक युवक ने उनकी मदद करने का फैसला किया और आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से उनके गांव और परिवार तक पहुंचने का रास्ता खोज निकाला।

जानकारी के अनुसार, पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत श्री अमृतसर साहिब की यात्रा पर गए चमन्न लाल 11 सितंबर को जालंधर से बिछड़ गए। यात्रा के दौरान वे गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए और हजारों किलोमीटर दूर बिहार पहुंच गए। अनजान जगह पर पहुंचने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी समस्या अपने घर और परिवार तक वापस पहुंचने की थी।

चार दिन तक युवक ने बुजुर्ग की देखभाल की

बिहार पहुंचने के बाद 19 वर्षीय नीरज कुमार की नजर चमन्न लाल पर पड़ी। नीरज ने बुजुर्ग को अपने घर ले जाकर उनकी मदद की। उन्होंने करीब चार दिनों तक चमन्न लाल के खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की।

नीरज के अनुसार, बुजुर्ग अपने घर का पूरा पता नहीं बता पा रहे थे। वह केवल अपने गांव का नाम ‘फतेहगढ़ गुज्जरां’ बता पा रहे थे। परिवार का सही पता, जिला और अन्य जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण नीरज के लिए उन्हें उनके घर तक पहुंचाना चुनौती बन गया।

AI और गूगल की मदद से शुरू हुई गांव की तलाश

नीरज ने हार नहीं मानी। उन्होंने गूगल और AI टूल्स की मदद से ‘फतेहगढ़ गुज्जरां’ नाम के गांव की तलाश शुरू की। कई स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद उन्हें पंजाब के लुधियाना जिले में इस नाम से जुड़े गांव का पता चला।

इसके बाद नीरज ने गांव और आसपास के क्षेत्र से संबंधित जानकारी जुटाई और बुजुर्ग के परिवार तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। तकनीक की मदद से मिली जानकारी ने इस पूरे प्रयास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गांव पहुंचकर बाजार में की बुजुर्ग की पहचान

गांव का पता मिलने के बाद नीरज बुजुर्ग चमन्न लाल को लेकर पंजाब के लुधियाना जिले के संबंधित गांव पहुंचे। वहां उन्होंने बाजार में लोगों से पूछताछ शुरू की और बुजुर्ग की पहचान कराने का प्रयास किया।

इसी दौरान मास्टर कृष्ण लाल ने चमन्न लाल को पहचान लिया। उन्होंने तुरंत गांव के लोगों और परिजनों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार तक सूचना पहुंची और बुजुर्ग के अपने लोगों से मिलने का रास्ता साफ हुआ।

पोते को देखकर भावुक हुए चमन्न लाल

परिजनों को बुजुर्ग के मिलने की जानकारी मिली तो परिवार में राहत की स्थिति बनी। नीरज ने चमन्न लाल को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया। इस दौरान बुजुर्ग की अपने पोते से मुलाकात हुई।

लंबे समय बाद परिवार के सदस्य को सुरक्षित देखकर माहौल भावुक हो गया। नीरज की पहल और तकनीक के इस्तेमाल से एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने परिवार तक वापस पहुंच सके।

इंसानियत और तकनीक का अनोखा मेल

यह घटना दिखाती है कि सही समय पर किसी जरूरतमंद की मदद करने की इच्छा और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किसी मुश्किल परिस्थिति का समाधान निकाल सकता है। जहां बुजुर्ग को अपने गांव का नाम तो याद था, लेकिन पूरा पता बताना संभव नहीं हो पा रहा था, वहीं नीरज ने उपलब्ध सीमित जानकारी के आधार पर AI और इंटरनेट की मदद से तलाश को आगे बढ़ाया।

एक अनजान व्यक्ति के लिए कई दिनों तक भोजन-पानी की व्यवस्था करना और फिर उसे उसके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने की कोशिश करना इस घटना का महत्वपूर्ण पहलू रहा। आखिरकार बुजुर्ग अपने पोते और परिवार से मिल सके।