रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते पहाड़ी इलाकों में पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया है।

बारिश और भूस्खलन के कारण प्रभावित रही केदारनाथ यात्रा मंगलवार सुबह दोबारा शुरू की गई। श्रद्धालुओं को हेलमेट पहनाकर करीब 100-100 के जत्थों में पैदल मार्ग पर रवाना किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरती जा रही है।

21 किलोमीटर के पैदल मार्ग पर 13 डेंजर जोन

सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक करीब 21 किलोमीटर का पैदल मार्ग है। इस रास्ते में 13 ऐसे डेंजर जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां बारिश के दौरान भूस्खलन और पहाड़ से पत्थर गिरने का खतरा अधिक रहता है।

इन संवेदनशील क्षेत्रों में मनकटिया, गौरीकुंड, जंगलचट्टी, चीरबासा, भीमबली, छोटी लिनचोली, रबासा हेलिपैड और बड़ी लिनचोली के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। बारिश के दौरान इन स्थानों पर यात्रियों की आवाजाही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

करीब 6500 यात्री मार्ग में फंसे थे

प्रशासन के मुताबिक सोमवार को बारिश के कारण करीब 6500 यात्री पैदल मार्ग में फंस गए थे। इनमें से यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक निकालने की कार्रवाई की गई। फिलहाल बारिश थमने के बाद यात्रा को फिर से शुरू किया गया है, लेकिन पहाड़ों में नमी के कारण पत्थर गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है।

यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से मौसम और मार्ग की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की गई है।

हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू

पैदल मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे मौसम की स्थिति के अनुसार यात्रियों को वैकल्पिक माध्यम से यात्रा करने की सुविधा मिल सकेगी।