लखनऊ। देश आज 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में 1947 के विभाजन की भयावह त्रासदी को याद कर रहा है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मौन मार्च का नेतृत्व कर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य समेत कई लोग मौन मार्च में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ हमें उस अकल्पनीय पीड़ा को याद करने और उससे सीख लेने का अवसर देता है। उन्होंने निर्दोष नागरिकों को नमन करते हुए देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च रखने का संदेश दिया।
सरदार पटेल की प्रतिमा से शुरू हुआ मौन मार्च
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद मौन पदयात्रा निकाली गई। यह मार्च विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों की स्मृति को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी को याद करना और नई पीढ़ी को उस दौर की घटनाओं से परिचित कराना है। विभाजन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था और व्यापक हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।
योगी बोले- इतिहास के इस अध्याय को भूलना नहीं चाहिए
मुख्यमंत्री ने विभाजन की त्रासदी को देश के इतिहास का बेहद पीड़ादायक अध्याय बताते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र को अतीत की गलतियों से सबक लेना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो और देश की एकता, अखंडता तथा सामाजिक सौहार्द मजबूत बना रहे।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में विभाजन से प्रभावित परिवारों की स्मृतियों और अनुभवों को सामने लाने तथा लोगों को उस दौर की घटनाओं से अवगत कराने पर जोर दिया जा रहा है।
1947 की त्रासदी की स्मृति में मनाया जाता है दिवस
भारत सरकार ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों, विस्थापित परिवारों और उस त्रासदी से प्रभावित लोगों की पीड़ा को याद करना है।
विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। परिवार बिछड़ गए और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इस त्रासदी की स्मृति आज भी उन परिवारों की पीढ़ियों में मौजूद है, जिन्होंने उस दौर को झेला था।
एकता और अखंडता का दिया संदेश
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए देशवासियों को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद रखना जरूरी है, लेकिन उनका उद्देश्य नफरत को बढ़ाना नहीं बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौन पदयात्रा इसी स्मरण और श्रद्धांजलि का हिस्सा रही। कार्यक्रम के माध्यम से विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों को नमन किया गया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया।
— पूरक न्यूज़


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