रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन पहुंच गया। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

शुक्रवार रात आंदोलनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई। स्टेट गेस्ट हाउस में करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में JPSC-JSSC Reform Manch के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चार राज्य मंत्रियों और एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ विभिन्न मांगों पर चर्चा की। सरकार ने छात्रों की मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखने और उन पर विचार करने की बात कही। हालांकि, बैठक के बाद छात्रों को किसी भी मांग को स्वीकार करने का ठोस या लिखित आश्वासन नहीं मिला।

छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-14 को रद्द करना, कथित भर्ती घोटाले की CBI जांच और जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता सामने आने पर ED की जांच शामिल है। छात्रों ने मुख्य आरोपी से कथित रूप से जुड़े अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा JPSC और JSSC की भर्ती एवं परीक्षा व्यवस्था में व्यापक संरचनात्मक सुधार की मांग की जा रही है।

बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन जब तक सरकार की ओर से लिखित निर्णय और जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी। छात्रों ने कहा है कि यदि 10 अगस्त तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत विधानसभा घेराव किया जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की चिंताओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता जताते हुए कहा है कि सरकार बातचीत के जरिए मामले का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CID जांच भी जारी है। आकाशवाणी के अनुसार CID ने पूछताछ के लिए JPSC के तीन सेवारत सदस्यों को समन किया है और इस मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

इस बीच, आंदोलन में शामिल छात्रों की मांगों को लेकर अलग-अलग छात्र समूहों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। शुक्रवार की वार्ता में JPSC-JSSC Reform Manch के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जबकि दूसरे छात्र मंच ने वार्ता में शामिल नहीं किए जाने पर असंतोष जताया।

फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले निर्णय और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव पर टिकी हैं।