नई दिल्ली, 7 अगस्त। देशभर में आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा और लाखों बुनकरों व कारीगरों के योगदान को याद किया गया। वर्षों से भारतीय बुनकर अपनी कला, मेहनत और रचनात्मकता के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार भविष्य में भी इस क्षेत्र के विकास और बुनकरों के हित में कार्य करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे भारतीय हथकरघा उत्पादों को अपनाएं और #NationalHandloomDay के साथ अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों तथा GRWM (Get Ready With Me) वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करें। उनका कहना था कि इससे देश के बुनकरों और कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।

भारत का हथकरघा उद्योग देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बनारसी साड़ी, चंदेरी, महेश्वरी, कांजीवरम, पोचमपल्ली इकत और पश्मीना जैसे पारंपरिक वस्त्र भारत की समृद्ध बुनाई कला के प्रमुख उदाहरण हैं। यह उद्योग लाखों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनी, जागरूकता कार्यक्रम और बुनकर सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल बुनकरों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत भी आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेगी।