भावनगर। गुजरात के भावनगर में लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी के साथ पुलिस की कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला भावनगर के एसटी बस स्टैंड का है, जहां 3 सितंबर को 40 वर्षीय काजल बारैया पर उसके लिव-इन पार्टनर फैजल उर्फ खटकी रफीक लखानी ने कथित तौर पर हमला किया था। गंभीर रूप से घायल काजल की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

पुलिस के मुताबिक, काजल और फैजल करीब सात वर्षों से साथ रह रहे थे और बस स्टैंड के आसपास फुटपाथ पर रहते थे। फैजल को काजल के उसके परिचित रवि उर्फ बोड़ा राजेंद्र गोहेल के साथ संबंध होने का शक था। इसी बात को लेकर 3 सितंबर को एसटी बस स्टैंड के मुख्य गेट के पास विवाद हुआ। विवाद बढ़ने के बाद फैजल ने काजल और रवि के साथ मारपीट की।

पूरी घटना बस स्टैंड में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। फुटेज में आरोपी महिला के साथ लगातार मारपीट करता दिखाई देता है। हमले में काजल गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे इलाज के लिए सर टी. अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना में रवि भी घायल हुआ था।

मामले में नीलमबाग पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर आरोपी फैजल को 4 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद 5 सितंबर को पुलिस आरोपी को उसी एसटी बस स्टैंड पर लेकर पहुंची, जहां वारदात हुई थी। यहां पुलिस ने घटना का क्राइम सीन रीक्रिएशन कराया और आरोपी से घटना का पूरा क्रम समझने की कोशिश की।

इसी दौरान सामने आए वीडियो में आरोपी फैजल को रस्सी से बांधा हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिसकर्मी उसे बस स्टैंड परिसर में अलग-अलग जगहों पर ले जाते हैं और कथित तौर पर डंडों से उसकी पिटाई करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।

नीलमबाग थाने के पुलिस इंस्पेक्टर डीपी उनाडकट ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे गंभीर और असाधारण मामला बताया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य अपराधियों में कानून का डर पैदा करना और महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर सख्त संदेश देना था।

हालांकि, पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर कानूनी और मानवाधिकार से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। खास बात यह है कि गुजरात के डीजीपी केएलएन राव ने 12 मई 2026 को पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गिरफ्तार आरोपियों को रस्सी से बांधना, सार्वजनिक रूप से घुमाना या इस तरह की कार्रवाई करना बंद किया जाए। डीजीपी ने ऐसी कार्रवाई को पुलिस की छवि और जनता के भरोसे के लिए नुकसानदायक बताया था।

मामले में आरोपी फैजल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, पुलिस द्वारा आरोपी की सार्वजनिक रूप से पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद इस कार्रवाई की वैधता और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद बढ़ गया है। नागरिक अधिकार संगठन पीयूसीएल ने भी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।